जैविक खाद (Organic Fertilizer) क्या है | बनाने की विधि लागत , कीमत , लाभ व हानि सम्पूर्ण जानकारी |

  जैविक खाद Organic Fertilizer एक प्राकृतिक खाद है | जो कि प्राकृतिक स्रोतों द्वारा प्राप्त होती है |

Organic Fertilizer

प्राचीन काल से ही जैविक खाद की मदद से जैविक खेती की जा रही है परन्तु आज के लोगो की लालच और पैसे की भूख ने कृषि को जैविक खाद से दूर कर दिया है | जैविक खाद का प्रचालन सदियों से चला आ रहा है | जैविक खाद जीवाश्मो के अवशेष को कहते हैं जिसमे बहुत ज्यादा मात्रा में नाइट्रोजन पाया जाता है जो की पौधों की वृद्धि में महत्त्व पूर्ण भूमिका निभाता है तथा मृदा में फास्फोरस और नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करने में मदद करता है | हमारे पूर्वजो की उम्र लगभग 100 से 120 वर्ष होती थी और वे रोगों से ग्रसित भी नही होते थे, परन्तु आज के लोगो की उम्र 60 से 70 वर्ष ही हो रही है परन्तु आज के समय में एक भी व्यक्ति ऐसा नही बचा है जिसको किसी भी प्रकार का रोग नही हो | इसका सबसे बड़ा कारण है कृषि के क्षेत्र में दवाइयों और कीटनाशकों का प्रयोग करना |  

आप इस ब्लॉग में जैविक खाद के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे |

Table of Contents

जैविक खाद Organic Fertilizer क्या है ?

    जैविक खाद को कार्बनिक खाद , जीवात्मक खाद , जीवांश खाद कम्पोस्ट खाद आदि नामों से जाना जाता है क्योकि जैविक खाद जीवाश्मो के तथा पेड़ पौधों के अपशिष्ट पदार्थों से प्राकृतिक क्रियाओं द्वारा बनती है | जैविक खाद एक प्राकृतिक खाद है जो जीवात्मक संसाधन की सहायता से प्राप्त की जाती है | जैविक खाद प्रकृति से प्राप्त होती है जिसके कारण इसके उपयोग से प्रकृति को भी नुकसान नही होता है | जैविक खाद जीवों के मल-मूत्र तथा प्रकृति में उपस्थित पेड़ पौधों से प्राप्त होती है |

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जैविक खाद के प्रकार (Types of Organic Fertilizer)

  ये नही की जैविक खाद सिर्फ प्रकृति के द्वारा ही बनायीं जाती इसे अब कृत्रिम रूप से भी बनाया जाता है | जो की निम्नलिखित प्रकार की होती हैं :-

1. गोबर की खाद

2. हरी खाद

3. कम्पोस्ट  

4. वर्मी कम्पोस्ट

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जैविक खाद के प्रकारों तथा उनके निर्माण का विस्तार पूर्वक वर्णन 
  1. गोबर की खाद
गोबर की खाद

 जैसा की इसके नाम से ही पता चल रहा है ये खाद पशुओं के मल-मूत्र से बनी खाद है | इसमे नाइट्रोजन 0.5 से 1.5 प्रतिशत , पोटेशियम 0.15 से 0.5 प्रतिशत , फास्फोरस 0.05 से 0.2 प्रतिशत , कैल्शियम 0.1 से 0.5 प्रतिशत , मैग्नीशियम 0.05 से 0.2 प्रतिशित , सल्फर 0.05 से 0.3 प्रतिशत तक पाया जाता है जो की पौधों की वृद्धि तथा स्वास्थ्य को शक्ति प्रदान करता है साथ ही साथ मृदा की उर्वक क्षमता और पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है | गोबर की खाद जैविक खाद का महत्वपूर्ण अंग है |

 बनाने की विधि

गोबर की खाद बनाने के लिए सर्वप्रथम आपको गाय या भैस का ताजा गोबर ले तथा इसे पानी के साथ अच्छे से मिश्रित कर ले | इसके लिए आप प्लास्टिक की बाल्टी ये ड्रम का उपयोग भी कर सकते है | खाद बनाने के लिए गोबर को हमेशा ठन्डे व शुष्क स्थान पर रख कर छोड़ दे | कुछ हप्तो तक फर्मन्टेशन की प्रक्रिया के बाद खाद तैयार हो जाएगी जिसे आप अपने फसल तथा पौधों में डाल सकते हैं |

2. हरी खाद  
हरी खाद  

 हरी खाद भी जैविक खाद का हिस्सा है पेड़ पौधों के द्वारा प्राप्त खाद को हरी खाद कहते हैं | यह एक प्रकार की पौधों की खाद होती है | इसमे नाइट्रोजन 2 से 5 प्रतिशत , पोटैशियम 1 से 2 प्रतिशत , फास्फोरस 1से 3 प्रतिशत , कैल्शियम 0.5 से 1 प्रतिशत , मैग्नीशियम 0.2 से 0.5 प्रतिशत , सल्फर 0.2 से 0.5 प्रतिशत तक हो सकता है | इसको बनाने के लिए कोई खास विधि नहीं है फसल के बोने के 30 से 35 दिन पहले ही खेत में हरी खाद वाली फासले जैसे सनई , डैचा , ग्वार ,मूग तथा लोबिया जैसे फसलो को उगा कर उन्हें कोमल अवस्था में ही जुताई कर के मिट्टी में मिला दिया जाता है | जो सड़ने गलने के बाद मृदा की भौतिक , रासायनिक तथा जैविक स्थिति की सुधार करता है | ऐसा माना जाता है की हरी खाद में के उपयोग से मृदा 75 से 150 किग्रा नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है | इसके उपायोग से मृदा में वायु संचार तथा पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है |

3. कम्पोस्ट 
कम्पोस्ट 

   कम्पोस्ट खाद भी एक प्रकार की जैविक खाद है जो सूखी पत्तियाँ , गोबर , खाद्य अपशिष्ट के द्वारा बनी होती हैं | कम्पोस्ट खाद जैविक तथा अजैविक दोनों खाद है | इस खाद में नाइट्रोजन (N), पोटैशियम (K), फास्फोरस (P), कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), सल्फर (S) तथा विभिन्न माइक्रोन्यूट्रिएंट्स   पाए जाते हैं | जो मृदा में उर्वरक शक्ति को बढ़ाते हैं |

 बनाने की विधि

 कम्पोस्ट खाद बनाए के लिए गोबर, सूखी पत्तियाँ , घास फूस आदि को एक गड्डे में डाल देते हैं | पानी आवश्यकतानुसार डालते रहते हैं | बीच बीच में मिट्टी की परत डाल कर और गोबर तथा अपशिष्ट पदार्थ डालते रहते हैं | इसे तैयार करने में कई महीने का समय लगता है | इसे ग्रामीण क्षेत्रो में ज्यादा बनाया जाता है |

4. वर्मी कम्पोस्ट
वर्मी कम्पोस्ट

  वर्मी कम्पोस्ट भी एक जैविक खाद है जो कीटों के द्वारा बनायी जाती है | यह पशुओं के गोबर से बनाई जाती है | इसमे विशेष प्रकार के कीट की सहायता ली जाती है जिसका नाम है केचुआ | इसलिए केचुए को किसानो का मित्र कहा जाता है | पहले के समय में बरसात के समय में केचुए बहुत ज्यादा मात्रा में दिखाई देते थे परन्तु आज के समय में बहुत अल्प मात्रा में दिखाई पड़ते हैं जिसका सबसे बड़ा कारण है | कृषि में कीटनाशकों का प्रयोग करना | वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से वातावरण को कुछ भी हानि नही होती है | वर्मी कम्पोस्ट में नाइट्रोजन , फास्फोरस , मैग्नीशियम तथा अन्य पोषक तत्व बहुत अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं जो फसलों और पौधों के लिए बहुत जरूरी होती हैं |

वर्मी कम्पोस्ट बनाने की विधियाँ

वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए सबस्से जरूरी सामग्री गोबर और केचुआ है | गोबर को गाँव में तो आप आसनी से प्राप्त कर सकते हैं परन्तु केचुए के लिए आपको अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र में जाना पड़ेगा | इसको बनाने के लिए बहुत सारी विधियाँ हैं जो निम्नलिखित हैं –

1. बेड विधि

2. पिट विधि

3. प्लास्टिक या टटिया विधि

1. बेड विधि
बेड विधि

इस विधि से आपको वर्मी कम्पोस्ट बनानी है तो सबसे पहले आपको ऐसे स्थान का चुनाव करना है जहाँ पर पानी न एकत्रित हो |फिर आपको पशुओं के गोबर का बेड बना लेना है | वर्मी कम्पोस्ट के लिए आपको एक बेड में लगभग 1 पाउंड केचुए की आवश्यकता होती है जिसमे लगभग 700 से 1000 केचुए मिल जायेंगे | बेड में केचुए मिलाने के बाद आपको उसके बेड के ऊपर पुआल या फिर सूखी घास को डाल दें , जिससे बेड में हमेशा नमी बनी रहे | अगर नमी कम हो जाये तो आपको बीच में पानी डालने की भी जरूत हो सकती है | जब गोबर भुरभुरा , काला भूरा और गंधरहित हो जाये तो आपको जान लेना है की आपकी जैविक खाद तैयार हो गयी है | इसके बाद इसको छलनी से से छान कर इसको भंडारित कर के अपने उपयोग में लाना है | आप इसको बेच के भी मुनाफा भी कमा सकते हैं |

2. पिट विधि
पिट विधि

इस विधि के द्वारा जैविक खाद बनाने के लिए सीमेंट की बनी क्यारियों की आवश्यकता होती है | जिसमे पशुओं के गोबर को डाल कर उसमे केचुए को मिला दिया जाता है जो की कुछ 6 से 10 महीनों में उसे खा कर खाद के रूप में बदल देते हैं | इसमे इस बात का ध्यान दें कि क्यारियों में पानी ण भर पाए तथा नमी भी बरकरार रहे | इसमे गोबर के साथ साथ गीला कचरा भी मिश्रित कर सकते हैं | जब खाद भुरभूरी हो जाये तो इसको अच्छे से छलनी की मदद से छान लें | अपने कृषि के कार्य तथा गमलों और बागवानी में इस्तेमाल करे जिससे ज्यादा पोषक वाली फसलें तथा सब्जियां प्राप्त होंगी |

3. प्लास्टिक या टटिया विधि
प्लास्टिक या टटिया विधि

इस विधि से जैविक खाद बनाने के लिए आपको प्लास्टिक के बैग या मजबूत बोरी की आवश्यकता होगी | प्लास्टिक बैग आपको ऑनलाइन ही आसानी से मिल जाएगी | इसके लिए आपको ऐसी जगह का चुनाव करना है जहाँ पर हमेशा नमी बनी रहे फिर आपको उसमे पशुओं का गोबर भर के उसमे केचुएँ को डाल दें केचुए को डालने के बाद उसे कुछ महीनों के लिए छोड़ दे | जब उसमे से गंध आना बंद हो जाये और वो चायपत्ती की तरह दिखने लगे तो समझ लेना है की आपकी खाद तैयार हो गई है | अब इसको छलनी की मदद से छानकर इसका उपयोग करें |

जैविक खाद के लाभ

आज के समय में लोगों को रासायनिक खादों के लाभ के बारे में जानकारी होगी परन्तु जैविक खेती के लाभ के बारे में जानकारी नहीं होगी | अगर जानकरी होती तो आज हम सभी को दवाइयों के प्रयोग से उत्पन्न फसल और सब्जियां न खानी पड़ती | जैविक खाद के उपयोग से भूमि की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है जिससे उत्पादन भी बढ़ता है और हमें पौष्टिक आहार मिलाता रहेगा | जैविक खाद के उपयोग से दुनिया की सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण प्रदूषण पर नियन्त्रण किया जा सकता है | जैविक खाद का उपयोग कृषि में मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाने के साथ मिट्टी के माइक्रोबायोम को सुधारने और पौधों को पोषण प्रदान करने के लिए किया जाता है साथ ही साथ भूमि की जल धारण की क्षमता बढेगी | किसानो की जैविक खेती करने में ज्यादा लगत की आवश्यकता नही होंगी | कोरोना कल में लोग जो इम्युनिटी से भरपूर आहार की तलास कर रहे थे वो उनको पहले से ही मिला रहेगा |

जैविक खाद के हानि

जिस भी चीज से फायदे होते हैं उसके कहीं न कहीं नुकसान भी होता है जैसे- जैविक खेती करने से फसल की पैदावार कम हो सकती है , कीटाणुओं और रोगों की बढ़ोत्तरी हो सकती है | जैविक खेती में अधिक श्रम की आवश्यता होती है और समय भी अधिक लगता है | जैविक खेती से रासायनिक खेती की तरफ जाने में बहुत कम समय लगता है परन्तु रासायनिक खेती से जैविक खेती की ओर जाने में बहुत समय लगता है जिसके कारण लोग इसे करना कम पसंद करते हैं | रासायनिक खाद आसानी से बाजारों में मिल जाती है परन्तु जैविक खाद ज्यादा मात्रा में नही मिल पाती है |

जैविक खेती कैसे करें

अगर आप जैविक खेती करना चाहते हैं तो आप पशुपालन करें जिससे आपको दोगुना मूनाफा होगा | इसमे आप दुग्ध उतपाद के साथ-साथ खाद भी बना सकते हैं परन्तु आपको इसमे ज्यादा महंगा और मेहनत वाला कम पढ़ सकता है | आप खाद बना के बेच भी सकते हैं जिससे आपको और ज्यादा मुनाफा होगा | इसे आप कम लगत में अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं |

जैविक खाद कीमत

अगर आप जैविक खाद को बाजार से खरीदते हैं या बेचते हैं तो ये आपको लगभग 10 रूपये पर किलो के हिसाब से मिल सकती है | ये खाद आपको किसी भी ऑनलाइन शॉपिंग एप पर आसानी से भी मिल जाएगी अगर आप जिससे आप घर बैठे ही अपने बगीचे और खेत की देखभाल आसानी से कर पाएंगे |

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