Spirulina ki Kheti- स्पिरुलिना की खेती से होगी लाखो की कमाई

Spirulina ki Kheti- स्पिरुलिना की खेती कर के घर से ही कम से कम 30 हजार की कमाई कर सकते हैं किसान भाई | पोषक तत्वों से भरपूर होने से कारण भारी मात्रा में है इसकी डिमांड |

दोस्तों आज के समय पर हमारे लिए पर्याप्त भोजन है परंतु संतुलित आहार की मात्रा बहुत ही कम है | क्योंकि हमारे भोजन में उपस्थित प्रोटीन और विटामिन तथा अन्य पोषक तत्व की मात्रा पकने के बाद बहुत ही कम हो जाती है |

बहुत से ऐसे लोग हैं जो की संपूर्ण आहार को ना खाने के कारण उनमें तथा उनके बच्चों में कुपोषण की शिकायत देखी जाती है |आज हम इस ब्लॉग के माध्यम से स्पिरुलिना की खेती (Spirulina ki Kheti) के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि एक सूपर फूड है |जिसमें सिर्फ 1 किलो ग्राम में ही लगभग 1000 सब जितना पोषक तत्व मौजूद होता है तथा दूध से लगभग 16 ग्राम अधिक प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है | तो चलिए शुरू करते हैं –

स्पिरुलिना क्या है ?

Spirulina ki Kheti- स्पिरुलिना एक प्रकार की शैवाल है | जिसे बोलचाल की भाषा में काई कहा जाता है | आपको बताते हैं कि पूरे विश्व में शैवाल की लगभग 1000 पर प्रजातियां मौजूद हैं | जिनमें सिर्फ स्पिरुलिना में ही अधिक पोषक तत्व मौजूद है तथा यह खाने योग्य है | इसे ब्लू ग्रीन एल्गी या नीली हाली हरी शैवाल कहा जाता है |

स्पिरुलिना में काफी अच्छी मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन A, विटामिन B, कॉपर, फोलिक एसिड तथा बहुत से ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो कि हमारे शरीर के लिए काफी आवश्यक होते हैं | लगभग 100 ग्राम स्पिरुलिना में ही 50 से 60 ग्राम तक प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है |

आज के समय में बाजार में बहुत सी ऐसी टैबलेट तथा दवाईयां आती है जो की स्पिरुलिना से बनी होती है | इसका उपयोग कुपोषित बच्चों तथा कमजोर व्यक्तियों के स्वास्थ्य के सुधार में किया जाता है |

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स्पिरुलिना के फायदे

स्पिरुलिना में काफी अच्छी मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो की हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं | स्पिरुलिना खाने के कुछ फायदे के बारे में हमारे ब्लॉग में विस्तार पूर्वक बताया गया है | जो की निम्नलिखित है-

  1. स्पिरुलिना में बहुत से ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो कि कैंसर जैसे खतरनाक बीमारी से लड़ने में सहायता करते हैं |
  2. स्पिरुलिना के इस्तेमाल से हमारे शरीर का ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है |
  3. स्पिरुलिना का उपयोग हमारे हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है |
  4. स्पिरुलिना के सेवन से हमारे मस्तिष्क की सूजन कम होती है तथा हमारी याददाश्त भी बढ़ती है |
  5. स्पिरुलिना के इस्तेमाल से हमारे शरीर की इम्युनिटी मजबूत होती है |
  6. स्पिरुलिना में काफी अच्छा मात्रा में आयरन तथा फोलिक एसिड मौजूद होता है जिसके कारण हमारे शरीर की रक्त अल्पता दूर होती है तथा रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा में बढ़ोतरी होती है |

स्पिरुलिना की खेती (Spirulina ki Kheti) कैसे करें

आपको बता दें कि स्पिरुलिना की खेती (Spirulina ki Kheti) किसी खेत में नहीं की जाती | इसकी खेती करने के लिए टैंक या छोटे गड्ढों की आवश्यकता होती है | टैंक तैयार करने के लिए आप पक्के टैंक सीमेंट से तैयार कर सकते हैं या अगर आप कच्चे टैंक तैयार करते हैं तो आप उसमें पॉलिथीन को बिछा दें जिससे मिट्टी पानी में ना मिल सके |

Spirulina ki Kheti

स्पिरुलिना की खेती (Spirulina ki Kheti) के लिए आवश्यक तापमान

स्पिरुलिना की खेती (Spirulina ki Kheti) के लिए तापमान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है | इसके लिए सबसे अच्छा तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस होता है |

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आवश्यक सामग्री
  1. स्पिरुलिना की खेती (Spirulina ki Kheti) बड़े-बड़े टैंकों में की जाती है जो की सीमेंट या प्लास्टिक या फिर कच्चे टैंक होते हैं | इसका सामान्यतः आकार लगभग 10 फीट लंबाई, 5 फीट चौड़ाई और 1.5 फीट गहरा होता है | इस आकार के टैंक बनाने से स्पिरुलिना को निकालने में आसानी होती है |
  2. टैंक के पानी को खींचना और पानी को पंप करने के लिए एक इलेक्ट्रिक पंप की आवश्यकता होती है |
  3. पानी की शुद्धता तथा PH मान को नापने के लिए थर्मामीटर PH सेंसर एयर कंप्रेसर आदि की आवश्यकता होगी |
  4. सामग्री में रसायन की बात की जाए तो यूरिया, सोडियम क्लोराइड, सोडियम बाई कार्बोनेट, मैग्नीशियम के सल्फेट, पोटेशियम और फास्फोरिक एसिड का उपयोग पानी को स्पिरुलिना के अनुकूल बनाने के लिए किया जाता है |
  5. खेती के लिए 1 किलोग्राम स्पिरुलिना की आवश्यकता होती है |
  6. स्पिरुलिना को सुखाने के लिए और संरक्षित करने के लिए ट्रे या फिर रैक की आवश्यकता होती है |

खेती का तरीका (Spirulina ki Kheti)

स्पिरुलिना की खेती (Spirulina ki Kheti) करने के लिए खारे पानी की आवश्यकता होती है इसलिए मीठे पानी में इसकी खेती करने के लिए मीठे पानी का पीएच मान 9 से अधिक करना होता है | स्पिरुलिना की खेती के लिए 9 से 11 पीएच मान का पानी सबसे अच्छा माना जाता है |

स्पिरुलिना की खेती (Spirulina ki Kheti) के लिए बने हुए टैंक में 1000 लीटर पानी में सभी रसायनों को मिलाया जाता है | इसके बाद खरीदी गई  स्पिरुलिना को टैंक में छोड़ने के बाद 20 से 25 मिनट तक लंबी डंडी का उपयोग करके प्रतिदिन हिलाया जाता है |

स्पिरुलिना को तैयार होने में समय

स्पिरुलिना को टैंक में डालने के बाद लगभग दो से तीन हफ्ते के बाद यह निकालने के लिए तैयार हो जाता है इसे निकालने के लिए सामान्यतः छन्नी के द्वारा छान लिया जाता है |

स्पिरुलिना को निकालने के बाद अच्छे से दबाया जाता है जिससे इसमें उपस्थिति काफी मात्रा में पानी बाहर हो जाता है| फिर इसे छांव में सुखाया जाता है |

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स्पिरुलिना की खेती (Spirulina ki Kheti) में समस्याएं

स्पिरुलिना की खेती (Spirulina ki Kheti) करने में कुछ समस्याएं भी आती हैं जिससे कारण और समाधान निचे बताएं गये हैं जिसका उपयोग कर के अपनी खेती में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं |

समस्या : बने हुए नए टैंक में स्पिरुलिना भूरे रंग या फिर पीले रंग में बदल जाता है तथा नीचे की सतह में जाकर सकता है |    कारण : स्पिरुलिना की खेती में खराब पानी का उपयोग तथा तापमान नियंत्रित न करना या फिर गलत खनिज पोषक तत्वों का उपयोग |

समस्या : स्पिरुलिना कलर वृद्धि नहीं करता तथा पीला हरा रहता है |
कारण : पर्याप्त धूप न मिलना |

समस्या : स्पिरुलिना अचानक पीले और पतली हो जाती है तथा गुच्छे दिखाई देने लगते हैं |
कारण : अपने वाला माध्यम या पानी असंतुलित हो जाने से यह समस्या आती है |

समस्या : पानी में झाग का निर्माण |
समाधान : पानी में जाग के प्रभाव को कम करने के लिए पानी में थोड़ी मात्रा में रख को मिलाया जाता है |

समस्या :पानी में जिलेटिन प्रकार का पदार्थ बनना शुरू हो जाता है और मिश्रण में समस्या उत्पन्न करता है |
समाधान : पानी पानी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ने पर समस्या से समाधान पाया जा सकता है |

समस्या : स्पिरुलिना अधिक मोती और जेली प्रारूप दिखाई देने लगे |
समाधान : अधिक पर कटाई करें |

समस्या : पानी से अमोनिया जैसी बदबू आती है |
समाधान : पानी में अधिक से अधिक ताजा पानी मिलाएं और इसे अच्छी तरह मिला दें |

स्पिरुलिना का उपयोग

स्पिरुलिना का उपयोग आज के समय में हमारे जीवन शैली के सुधार में किया जा रहा है | इसका उपयोग फैक्ट्रियां चॉकलेट तथा नूडल्स को बनाने में भी कर रही है | स्पिरुलिना की कुछ उपयोग निम्नलिखित हैं-

  • स्पिरुलिना का उपयोग जब किसी व्यक्ति में उच्च पोषण की आवश्यकता होती है तब इसे आहार सप्लीमेंट्री के रूप में लिया जाता है |
  • स्पिरुलिना की मदद से वजन को नियंत्रित किया जा रहा है |
  • स्पिरुलिना में सब्जियों तथा फलों से 1000 गुना अधिक पोषक तत्व मौजूद होता है | जिसके कारण इसका उपयोग सुपर फूड के रूप में किया जा रहा है |
  • स्पिरुलिना में अच्छी मात्रा में प्रोटीन मौजूद होता है इसलिए इसका उपयोग प्रोटीन सोर्स के रूप में किया जा रहा है |
  • स्पिरुलिना का उपयोग बहुत सी दवाइयां तथा टैबलेट को मनाने में भी किया जा रहा है |

Spirulina ki Kheti

नोट:-  स्पिरुलिना का उपयोग आपके शरीर के लिए सुरक्षित नहीं हो सकता है इसका उपयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें

स्पिरुलिना की खेती में लाभ

स्पिरुलिना की खेती (Spirulina ki Kheti) कम निवेश में अधिक आमदनी प्रदान करने वाली खेती है | इसकी खेती में उत्पादन की बात की जाए तो बताएं गए टैंक के आकार के अनुसार प्रति टैंक प्रतिदिन एक किलोग्राम स्पिरुलिना का उत्पादन ले सकते हैं |

वही स्पिरुलिना की कीमत की बात की जाए तो स्पिरुलिना का पाउडर बाजार में लगभग ₹1000 की प्रति किलो की दर से बिकता है | इस प्रकार आप सिर्फ एक टैंक से ही सभी खर्चों के अलावा महीने के ₹30000 आसानी से कमा सकते हैं |

आप भी अपनी पारंपरिक खेती के साथ साथ स्पिरुलिना की खेती (Spirulina ki Kheti) कर के लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं |

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