मोती की खेती Pearl Cultivation in Hindi कैसे करें ? लागत, कीमत सम्पूर्ण जानकारी |

Table of Contents

मोती की क्या है ? what is pearl

 मोती एक रत्न है जो आभूषण बनाने में अधिक उपयोग किया जाता है |

Pearl Cultivation in Hindi- भारत में अधिकतर कृषक पारंपरिक कृषि पर आश्रित हैं जिससे उन्हें कम आमदनी और बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | शादियों से ही इस पारम्परिक कृषि का प्रचलन चला आ रहा है परन्तु आज के समय के किसान इस पारम्परिक कृषि की ओर नही बल्कि आधुनिक कृषि की ओर अग्रसित हो रहे हैं |

जिसमें से ही एक कृषि लघु उद्योग मोती की खेती (Pearl Cultivation in Hindi) भी है जिसे हम लघु उद्योग भी कह सकते हैं क्योकि मोती की खेती एक्वाकल्चर Aquaculture के अंतर्गत आती है | मोती की भी मछली तथा केकड़े की तरह ही खेती होती है |

इसे भी पढ़ें- Hop Shoots ki kheti- हॉप शूट्स की खेती से किसान कमा रहे करोड़ों, विश्व की सबसे महँगी खेती

मोती की खेती क्या है ?

Pearl Cultivation in Hindi- मोती की खेती एक्वाकल्चर के अंतर्गत आता है | प्राचीन कल से ही मोतियों का उत्पादन समुद्रो से किया जाता था परन्तु आज के समय मोती की भारी मात्रा में माँग है, जिसकी आपूर्ति समुद्रो से करना मुस्किल तथा महंगा पड़ सकता है | इसका इस्तेमाल आभूषणों के रूप में किया जाता है तथा आज के समय में कुछ खाद्य पदार्थों जैसे च्यवनप्राश तथा टानिक बनाने के रूप में किया जा रहा है |
Pearl Cultivation in Hindi

मोती के लिए सीप की प्राप्ति तथा रख रखाव

Pearl Cultivation in Hindi- मोती की खेती सबसे पहले तालाब या फिर सीमेंट का टैंक बनाना चाहिए | अगर आप तालाब में सीप को रखना चाहते है तो तालाब में पालीथीन को बिछा दे जिससे तालाब पानी कम सोखेगा | और सीमेंट का टैंक बनवा रहे हैं तो ऐसा टैंक बनवाए जिससे पानी टैंक से बाहर न आए |

मोती की खेती (Pearl Cultivation in Hindi) के लिए सीप को नदी से लाया जाता है परन्तु अब आसानी से सीप बाजारों में मिल जाता है | इस बात का अवश्य ध्यान दें की बाजारों में मिलने वाली सीपों को साफ पानी में रखना होता है क्योकि गंदे पानी में सीप मर जाता है | सीप का चारे के रूप में शैवाल ( काई ) को खाता है |

प्रकृति में मोती किस प्रक्रिया द्वारा बनता है ?

मोती का निर्माण  घोंघा (Oyster) नामक़ जीव के शरीर के अन्दर होता है जो की समुद्र के अन्दर होता है | समुद्र में मोती का निर्माण सीप के खोल के अन्दर किसी रेत के कण के प्रवेश हो जाने पर होता है | खोल के अन्दर रेत का कण प्रवेश होने के बाद जब रेत का कण खोल में उपस्थित जीव को चुभता है तो जीव में के अन्दर एक चिपचिपा पदार्थ निकालने लगता है |

ये पदार्थ ज्यादा दिन तक निकलने से वो उस रेत के कण के ऊपर परत पर परत बनता रहता है जो की कई महीनो तक यही प्रक्रिया होने से कठोर मोती का रूप लेने लगता है | ये मोती कैल्शियम कार्बोनेट का होता है | ये प्रकृति के द्वारा घटित होती है |

मोती की खेती में मोती बनने की प्रक्रिया

मोती की खेती (Pearl Cultivation in Hindi) कृत्रिम रूप से करने के लिए सीप का आपरेशन कर के सीप के अन्दर जिस आकर में मोती को प्राप्त करना होता है उस आकार का  कैल्शियम कार्बोनेट का ४ से ६ मिलीमीटर का टुकड़ा दल देते हैं | जिसके बाद प्राकृतिक रूप से ही सीप में मोती तैयार हो जाता है |

सीप का आपरेशन तथा रख रखाव  

सीप का आपरेशन करते समय सीप के खोल को सिर्फ १० मिलीमीटर तक ही खोलते है क्यो कि १० मिलीमीटर से ज्यादा खोलने से सीप के मरने का खतरा बढ़ जाता है फिर सीप के अन्दर मनचाहे आकर का 4 से 6 मिमी बड़ा टुकड़ा दल देते हैं | सीप का आपरेशन करने के बाद सीपों को  एक अलग टैंक में नायलन के बैग में प्राकृतिक चारे के साथ 1 से 1.4 फीट पानी में रखते हैं |

आपरेशन के बाद ये ध्यान देते रहना चाहिए की अगर कोई सीप मर जाता है तो उस सीप को जल्द से जल्द पानी से बाहर निकल दे और नया पानी टैंक में भर दें | क्योकि सीप के मर जाने के बाद उसके शरीर से बहुत ज्यादा मात्रा में अमोनिया निकालता है जो पूरे पानी में फ़ैल जाता है जिससे और भी सीपों के मरने का खतरा बना रहता है | इस बीच पानी में उपस्थित अमोनिया को चेक करते रहना चाहिए |

 सीप के प्रमुख प्रकार  

मोती के सीप (Pearl Oysters) कई प्रकार के होते हैं, जिनमें से कुछ उन्हें व्यवसायिक रूप से मोती उत्पन्न करने के उद्देश्य से पाले जाते हैं और कुछ के आकार, बनावट और रंग की वजह से रत्नों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। निम्नलिखित हैं कुछ प्रमुख प्रकार के सीप:

  1. ओस्ट्रेच (Oysters): ये सीप मोती की खेती (Pearl Cultivation in Hindi) के लिए सबसे आम और प्रसिद्ध होते हैं। ओस्ट्रेच के अंदर मोती बनाने की प्रक्रिया होती है और इन्हें व्यवसायिक रूप से खेती किया जाता है।
  2. मस्सेल्स (Mussels): मस्सेल्स भी मोती उत्पन्न करने के लिए प्रयुक्त होते हैं, लेकिन इनके द्वारा उत्पन्न मोती आमतौर पर छोटे होते हैं और उनकी बनावट और रंग में विविधता होती है।
  3. अभाल (Abalone): अभाल भी एक प्रकार के सीप होते हैं जो मोती उत्पन्न करते हैं, लेकिन इनके उत्पन्न किए गए मोती आमतौर पर छोटे होते हैं और उनकी बनावट और रंग भी विशिष्ट होते हैं।
  4. गाही सीप (Giant Clams): गाही सीप भी एक प्रकार के मोती उत्पन्न करने वाले सीप होते हैं, लेकिन इनके उत्पन्न किए गए मोती बड़े होते हैं और इनकी बनावट और रंग भी विविधता दिखाते हैं।

ये कुछ प्रमुख प्रकार के सीप हैं जिनमें से मोती उत्पन्न किए जाते हैं। हर प्रकार के सीप की अपनी विशेषताएँ होती हैं और ये भिन्न-भिन्न भूगोलीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं |

आधुनिक खेती की विस्तार से जानकारी लेने के लिए इसे पढ़े

मोती की खेती में लागत

 मोती की खेती (Pearl Cultivation in Hindi) में लागत कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि सीपों की प्राप्ति, पालन, समय, स्थान, तकनीक, और आपके क्षेत्र की जलवायु की परिस्थितियाँ। यहां विभिन्न लागतों की कुछ सामान्य संकेतांक दिए जा रहे हैं:

  1. सीपों की खरीद: सीपों की प्राप्ति की लागत सीपों के प्रकार, उपलब्धता और गुणवत्ता पर निर्भर करेगी।
  2. जलवायु और स्थान: आपके क्षेत्र की जलवायु, जलस्रोतों की उपलब्धता और परिस्थितियों के आधार पर आपको सीपों की पालन में विभिन्न लागतों का सामना करना पड़ सकता है।
  3. इंफ्रास्ट्रक्चर: सीपों की खेती के लिए उचित इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कि तालाब, जलकण, और सुरक्षित स्थान की आवश्यकता होती है जिनकी लागत भी आती है।
  4. खाद्य और पोषण: सीपों को उचित आहार और पोषण प्रदान करने के लिए खाद्य प्राप्त करने की लागत भी होती है।
  5. अन्य खर्च: सीपों की सही देखभाल, संतुलित प्रबंधन, और सुरक्षा के लिए अन्य खर्च भी शामिल होते हैं।
  6. व्यवसायिक सलाह: सीपों की खेती के लिए व्यवसायिक सलाह लेना भी महत्वपूर्ण होता है, जो आपको उचित तकनीक, प्रक्रिया और व्यवसायिक योजना के बारे में बता सकता है।

लागत के विभिन्न प्राकृतिक और स्थानीय पारिस्थितिकी तथा आपके योजनाओं के आधार पर भिन्न हो सकती है, मोती की खेती (Pearl Cultivation in Hindi) के लिए बाजार में एक सीप की कीमत लगभग 10 से 30 रूपये तक होती है था एक सीप के आपरेशन का  खर्च लगभग २० रूपये आता है | एक सीप की औसतन लगत 50 रूपये आएगी |

सीप के लिए उपयुक्त समय

मोती की खेती (Pearl Cultivation in Hindi) के लिए लगभग 15 से 20 महीने का समय लगता है | मोती की खेती के लिए सीप के पालन और उत्पन्नता के लिए सही समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसका पालन करने के लिए निम्नलिखित तरीके और मार्गदर्शन का पालन करें:

  1. मौसम और जलवायु: सीप की खेती के लिए सही मौसम और जलवायु महत्वपूर्ण होते हैं। जीवों को स्थिर और अनुकूल जलवायु में रखने का प्रयास करें, क्योंकि अधिकतम तापमान, अधिक गरमी या ठंडी जलवायु उनके विकास को प्रभावित कर सकती है।
  2. प्राकृतिक जलधारा: सीप को उचित प्राकृतिक जलधाराओं में पालना बेहतर होता है, क्योंकि इससे उनके स्वास्थ्य और विकास को अधिक सुरक्षा मिलती है।
  3. बुआई का समय: सीप की बुआई का समय सही चुनना महत्वपूर्ण है। यह आपके क्षेत्र की जलवायु और मौसम के आधार पर निर्धारित होता है।
  4. पोलीशिंग और देखभाल: सीप की देखभाल में पोलिशिंग का भी महत्व होता है, जिससे कि सीपों की बनावट और गुणवत्ता बढ़ सकती है।
  5. बाजार की मांग: सीपों की उत्पन्नता को बाजार की मांग के साथ मेल करने के लिए आपको उचित समय पर उत्पन्नता करने का प्रयास करना चाहिए।
  6. सम्पूर्ण देखभाल: सीपों की सामान्य देखभाल का पालन करना महत्वपूर्ण है, जैसे कि उचित आहार, स्वच्छता, और समय-समय पर मेडिकल जांच।

मोती की खेती के लिए सही समय की जानकारी आपके क्षेत्र की जलवायु, मौसम, और स्थानीय तथ्यों पर निर्भर करती है, इसलिए आपको अपने क्षेत्र के मोती उत्पन्न करने के लिए सही समय के बारे में स्थानीय विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए।

मोती की खेती (Pearl Cultivation in Hindi) के लिए ट्रेनिंग

मोती की खेती (Pearl Cultivation in Hindi) अन्य खेती के जैसी नहीं है इसके लिए ट्रेनिंग की जरूरत होती है | अगर आप बिना ट्रेनिंग के ही मोती की खेती करना शुरू का देते हैं तो आपको भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है | अगर आप बिना ट्रेनिंग के ही सीप की सर्जरी कर देते हैं तो शायद ही सीप जिन्दा रह पाए |

बिना ट्रेनिग के सीप की खेती (Pearl Cultivation in Hindi) करना बहुत कठिनाई भरा काम है | जैसे एक चिकित्सक किसी भी व्यक्ति का आपरेशन करने से पहले ट्रेनिंग और बहुत पढाई की जरूरत होती है उसी प्रकार सीप की खेती (Pearl Cultivation in Hindi)में भी ट्रेनिंग की काफी जरूरत होती है | मोती की खेती (Pearl Cultivation in Hindi) के लिये सरकार द्वारा CIFA यानी सेंट्रल इंस्‍टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर नामक संस्था बनाई गई है, जो मोती की खेती (Pearl Cultivation in Hindi) के बारे में 15 दिन की फ्री ट्रेनिंग देती है |

ट्रेनिंग लेने के लिए क्लिक करें

मोती की कीमत

(Pearl Cultivation in Hindi) एक सीप में आमतौर पर एक ही मोती मिलाती है मोती की कीमत कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है, जैसे कि मोती का आकार, बनावट, रंग, गुणवत्ता, शानदारता, प्रकार, और विशेषताएँ। मोती की विशेष बनावट, उनकी शानदारता, और उनके उपयोग के आधार पर भी कीमत में भिन्नता हो सकती है।

व्यवसायिक तौर पर उत्पन्न किए गए मोतियों की कीमत भी विभिन्न आकार, गुणवत्ता, और पूर्वानुमान के आधार पर निर्धारित की जाती है। व्यापारिक मोतियों के लिए, कीमत बाजार और उपयोगकर्ताओं की मांग के साथ बदलती रहती है।

बाजार में एक मोती की कीमत 200 से 2000 के बीच होती है एस कीमत में उतर चढाव होता रहता है