kesar ki kheti- केसर की एरोपोनिक तकनीक द्वारा लाखों कमाएं |

kesar ki kheti नमस्कार दोस्तों आपका हमारे इस आधुनिक कृषि पोर्टल Agribusiness पर स्वागत है आपको पता होगा की केसर की खेती कश्मीर जैसे ठंडे इलाको में होती है क्या आपने कभी ये नहीं सुना है कि केसर की खेती (Kesar Farming at Home) आप घर पर या फिर किसी कंटेनर में भी कर सकते हैं |

जी हाँ दोस्तों आज के आधुनिक दौर में यह सब मुंकिन है | आज हम आपको एक ऐसी तकनीकी के बारे में बताने वाले हैं जिसके उपयोग से केसर की खेती को आप भी अपने घर के कमरे से ही या फिर छोटे से कंटेनर में कर सकते हैं | तो संपूर्ण जानकारी के लिए हमारे ब्लॉक को पूरा पढ़ें |

kesar ki kheti

kesar ki kheti वर्तमान समय में अपने देश में बेरोजगारी बहुत तेजी से बढ़ रही है केसर की खेती आज के युवाओ के लिए एक बहुत ही अच्छा विकल्प है | जिसमें आप घर बैठे ही घर से ही एक रोजगार की शुरुआत कर सकते हैं | आपको पता ही होगा की बाजारों में केसर की कितनी मांग रहती है तथा केसर बहुत ही महंगा बिकता है |

केसर क्या है ?

kesar ki kheti– केसर एक प्रकार का सुगंधित मसाला होता है |अंगेजी में इसे Saffron कहते हैं जो कि सुगंध और रंग को प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह पौधा विशेष रूप से एशियाई और औसतन ईरान में पाया जाता है और सबसे महंगा मसाला माना जाता है। केसर के लाल रंग की थ्रेड्स होती हैं, जिन्हें साफ़ करके और सूखाकर उन्हें उपयोग में लाया जाता है।

केसर का उपयोग विभिन्न व्यंजनों और खाने की वस्तुओं में रंग और स्वाद में फ्लेवर या खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह खासकर बिरयानी, केक, मिठाइयों, और दिलचस्पी से बने खाने के लिए उपयोग किया जाता है।

केसर के उपयोग के कई औषधीय गुण भी होते हैं और इसे आयुर्वेदिक चिकित्सा में भी उपयोग किया जाता है। केसर का उपयोग दर्द, तनाव, और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने में किया जाता है। इसके अलावा, यह खांसी और ठंड का इलाज के लिए भी उपयोग किया जा सकता है।

केसर महंगा होता है, क्योंकि इसे प्राप्त करने के लिए बहुत कठिनाईयाँ होती हैं और इसकी पैदावार भी बहुत ही कम होती है। इसके बावजूद केसर का उपयोग एक महत्वपूर्ण रंग और स्वाद देने के लिए किया जाता है।

असली केसर को कैसे पहचाने ?

केसर एक सबसे महंगे मसलों में से एक है जिस कारण बाजारों में बहुत से नकली केसर भी मिलते है | इसलिए आप केसर खरीदते समय केसर कैसे पहचाने |

केसर की पहचान करने के लिए असली केसर के एक फूल को पानी में डालेंगे तो वह तुरंत रंग नहीं छोड़ेगा अगर आप असली केसर को खायेंगे तो यह थोड़ा लगेगा और उसकी सुगंध बहुत अधिक आयेगी, वहीं नकली केसर पानी में डालते ही तुरंत रंग छोड़ देता है |

केसर के गुण

केसर के महंगा होने के साथ साथ बहुत ही इसमें बहुत से गुण भी मौजूद होते हैं | इसमें पाए जाने वाले तत्व हमारे शरीर से लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं जो कि निम्नलिखित हैं –

  • केसर के सेवन से आपके शरीर में होने वाले दर्द में राहत मिलाती है |
  • यह आपकी मानसिक प्रसन्नता को बढ़ाने में मदद करता है |
  • यह आपकी याददाश्त को मजबूत रखने में मदद करता है |
  • शरीर में उत्पन्न होने वाले सूजन को कम करने में सहायता करता है |
  • शरीर की ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है |
  • शरीर में होने वाले पाचन को सही करने में मदद करता है |
  • हमारे शरीर के प्रतिरक्षक तंत्र को मजबूत करता है |
  • त्वचा को निखारने और सुंदरता को बनाए रखना मदद करता है |

केसर के उपयोग तथा गुण

  1. केसर एक ऐसा मसाला है जो की सालो साल रखने पर भी एक कभी खराब नहीं होता |
  2. केसर का उपयोग दूध और मिठाई का स्वाद बढ़ाने और रंग के लिए किया जाता है |
  3. आयुर्वेद में केसर एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में माना जाता है यह गठिया, बाँझपन, यकृत वृद्धि , बुखार आदि का इलाज करने में रामबाण साबित हुआ है |
  4. परफ्यूम एवं सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण के लिए केसर एक खास सामग्री है |

केसर की खेती (kesar ki kheti)

kesar ki kheti- दुनिया भर में लगभग 90% केसर का उत्पादन उत्पादन कश्मीर के पाम्पोर में ही होता है | केसर के लिए लिए बहुत अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है | यह वातावरण जम्मू और कश्मीर में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध होता है पाम्पोर के आलावा हिमांचल प्रदेश में भी केसर की खेती होती है | केसर का उत्पादन फ़्रांस, स्पेन, इटली,ग्रीस, जर्मनी, जापान, रूस, आदि देशों में इसकी खेती की जाती है | इसका उत्पादन ईरान और पहाड़ी कुछ पहाड़ी इलाकों में भी होता है |

दुनिया भर में लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण केसर का उपयोग भी बड़ा है जिसके कारण केसर का उत्पादन में कोई खास वृद्धि नहीं हो पाई है | बीते कुछ साल से पाम्पोर की जलवायु में भी बदलाव हो तरह है जिसके कारण केसर की खेती में समस्याएँ आ रही है | केसर का उत्पादन बढ़ाने के लिए ईरान ने एरोपोनिक तकनीकी विकसित की है | इसका इसतेमाल कर के भारत के किसान भी अपने घर के एक कमरे से या फिर किसी कंटेनर में भी बहुत अधिक मुनाफा कमा रहे हैं |

एरोपोनिक तकनीकी क्या है ? (kesar ki kheti)

एरोपोनिक तकनीकी आज की आधुनिक कृषि की एक ऐसी प्रणाली है जिसमें पौधों की जड़ें हवा में लटकती रहती हैं जिसमें स्प्रे के माध्यम से पोषक तत्वों का छिड़काव किया जाता है इसमें पौधों को नम वातावरण में रखते हैं एरोपोनिक तकनीक का उपयोग के घर के अंदर कमरे में या कंटेनर में किया जाता है स्थिति को करने के लिए आपको तापमान आर्द्रता तथा जल करना पड़ता है इसमें फसलों का उत्पादन अच्छा होता है |

केसर की खेती (kesar ki kheti) को आप इस विधि द्वारा आप किसी भी खेती को कहीं पर कर सकते हैं | एरोपोनिक तकनीक द्वारा खेती करने का सबसे बड़ा मुनाफा है कि इसे आप छोटी से छोटी जगह या बहुत ही सीमित स्थान में भी कर सकते हैं और आपको एरोपोनिक तकनीकी द्वारा खेती करने पर अधिक मुनाफा भी होगा |

एरोपोनिक तकनीकी की विस्तार पूर्वक जानकरी के लिए इसे पढ़ें

एरोपोनिक तकनीकी द्वारा केसर की खेती (kesar ki kheti) कैसे करें ?

एरोपोनिक तकनीकी द्वारा केसर की खेती (kesar ki kheti) करना चाहते हैं तो आपको एक कमरे की या फिर किसी कंटेनर की आवश्यकता होगी जिसमें आपको आधुनिक मशीनों से युक्त एक लैब तैयार करना होगा | एरोपोनिक तकनीक द्वारा केसर की खेती (kesar ki kheti) करने के लिए एक उच्च गुणवत्ता वाले लैब की आवश्यकता होती है |

लैब को तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री

  • बंद वातावरण वाला कैमरा या फिर कंटेनर
  • थर्माकोल शीट (जिससे कमरे का तपमान नियंत्रित रहे)
  • कूलर या एयर कंडीशनर
  • आर्द्रता और तापमान मापन केंद्र
  • ह्यूमिडिफायर
  • LED लाइट सफेद रंग की
  • लकड़ी या प्लास्टिक से बनी ट्रे या फिर अलमारियां
  • फूल आने के बाद कोक को मिट्टी में स्थानांतरित करने के लिए कृषि योग्य भूमि
  • चीलर प्लांट (जो कि कमरे का

केसर की खेती (kesar ki kheti) के लिए लैब कैसे तैयार करें

  • केसर की एरोपोनिक तकनीकी से खेती (kesar ki kheti) के लिए आपको सबसे पहले लैब का एक ढांचा तैयार करना होता है जिसके बाद इसमें भारी जैसे चिलर प्लांट, एयर कंडीशनर, ह्यूमिडिफायर, LED लाइट तथा बिजली आदि को स्थापित करना होता है इसके बाद पूरी लैब को बाहरी तापमान से अलग नियंत्रित करना होता है इसके लिए थर्माकोल शीट या Polyurethane Foam Sheet से दीवार को कवर करना जरूरी होता है जिस कमरे का तापमान नियंत्रित रहे |
  • केसर की कोक को रखने के लिए लकड़ी से बनी बारात बनी ट्रे या फिर प्लास्टिक की ट्रे का उपयोग किया जाता है | अगर आप इसको बनाने के लिए लकड़ी का उपयोग कर रहे हैं तो ऐसी लकड़ी का प्रयोग करें जिसके अंदर भारी मात्रा में नमी बरकरार हो सके | आप इसकी अलमारी या ट्रे बनाने के लिए जिस पेटी में आम तथा अन्य फल पैक किए जाते हैं उसके बेटी का उपयोग करें यह आपको सस्ते दामों पर उपलब्ध भी हो |
  • आप मंजिला की अधिकतम लंबाई और चौड़ाई 3 x 2 फुट होना चाहिए अथवा आप अपने अच्छा अनुसार और अपने कमरे तथा अपने संसाधन के अनुसार भी बना सकते हैं |
  • सभी सामग्री को स्थापित हो जाने के बाद अब बारी आती है ट्रे को रखने की ट्रे को रखने के लिए आप कम से कम 3 और अधिकतम 5 मंजिला बनाएं हर मंजिलें की ऊंचाई एक दूसरे से 15 से 18 इंच तक रखें | रैंक बनाने के बाद इसके मध्य तेरे को स्थापित कर दीजिए |
  • आप अपने कमरे में दो या दो से अधिक ट्रे रखने के लिए तैयारी कर रहे हैं तो आपको उसके मध्य गलियारा बनाने की आवश्यकता होगी जिससे आपको केसर के पौधों का निरीक्षण करने में कोई समस्या न आये |
  • अगर आप 5 मंजिला रैक या अलमारी 20 वर्ग फुट के क्षेत्र में केसर उगाने की सोच रहे हैं तो आप के लिए लगभग 1 तन केसर के या बीच की जरूरत होगी |

केसर की प्रमुख किस्म

केसर की खेती (kesar ki kheti) के लिए भारत में मुख्यतः दो प्रकार की किस्म ही उत्तम मानी जाती हैं जो नीचे दी गई हैं-

  1. कश्मीरी केसर या मोगरा केसर
  2. अमेरिकन केसर

कश्मीरी केसर की वर्त्तमान में बाजारों में कीमत लगभग 200000 से 500000 रुपए प्रति किलोग्राम के दर से बिकता है तथा वहीं अमेरिका कैसे की बात की जाए तो यह 50000 से ₹85000 प्रति किलो की दर से बिकता है |

केसर के बीज कहां से लें

(kesar ki kheti) अगर आप कैसे की खेती करना चाहते हैं तो कैसे के बीजों की आवश्यकता होगी जो कि आपको कश्मीर के पेंफर्ड बंपर में आसानी से अच्छी कीमत में और तथा अच्छे बीज मिल जाएंगे इसके अलावा केसर की एयरप्लेन अपनी खेती करने वाले किसान इसे ऑनलाइन indiamart.com वेबसाइट से या फिर पालमपुर में स्थिति सी एच ए आर हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान से केसर के बल्ब या को कहानी की बी को आसानी से खरीद सकते हैं |

केसर के बीज का शोधन कैसे करें

केसर की खेती (kesar ki kheti) करने के लिए उसके बीज का शोध करना बहुत ही जरूरी होता है चाहे वह बाण पुणे तकनीक से हो या फिर पारंपरिक केसर फार्मिंग तकनीक से हो इसमें केसर केक कोक को शोधित करने के लिए किताब रहित कीटाणु रहित, केसर के ऊपर लगी अवांछनीय गंदगी केसर की कोक में आई खराबी को साफ साफ करने जैसे बहुत से कार्य शामिल होते हैं |

कैसे की कोक या बीज की अच्छे सफाई कटाई या कटाई सफाई कर जाने के बाद इसे इसे कटक रहित और किताब रहित बनाने के लिए इसे कीटाणु नाशक खोल में कुछ समय के लिए डुबाया जाता है |

कीटाणु नाशक घोल बनाने के तरीके

कीटाणु नाशक घोल बनाने के दो तरीके हैं –

  • ऑर्गेनिक कीटाणु नाशक घोल
  • केमिकल आधारित कीटाणु नाशक घोल
  • ऑर्गेनिक कीटाणु नाशक घोल बनाने के लिए नीम के तेल का प्रयोग किया जाता है और केमिकल आधारित कीटाणु नाशक गोल बनाने के लिए crabendazim fungicide तथा acaricide 2 : 1 के अनुपात में घोलकर तैयार किया जाता है |
  • इस तैयार घोल में केसर के कोक को या बीज को डुबोकर उसे छांव में ही सुखाया जाता है |
  • इस केसर के बीज को तब तक सुखाया जाता है जब तक इसमें से नमी पूर्ण रूप से बाहर ना हो जाए |
  • इस प्रक्रिया को करने के बाद केसर का कोक या बीज पूर्ण रूप से एरोपोनिक तकनीक या फिर पारंपरिक तकनीकी द्वारा खेती करने के लिए तैयार हो जाता है
  • केसर के बीच का शोधन इसलिए करते हैं जिससे केसर की केसर में कोई रोग या उसमें कवक या फंगस ना लगे और केसर का बीज पूर्ण रूप से स्वस्थ रहें |

केसर की खेती (kesar ki kheti) के लिए तापमान

एरोपोनिक तकनीक द्वारा केसर की खेती (kesar ki kheti) में कमरे में कंटेनर में तैयार लाभ के लैब में स्थापित ट्रे केसर को सुव्यवस्थित तरीके से रख दें।

केसर के बीज को रखने के बाद अब बारी आती है कि उसे ऐसा वातावरण दिया जाए जिसमें उन्हें लगे कि उनके अंकुरण का समय आ गया है इसके लिए आपके कमरे का तार या लैब का तापमान न्यूनतम 1 से 3 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान 65 से 75 प्रतिशत आद्रता से युक्त ठंडा कमरे में सात से 10 दिन के लिए रखा जाता है इसके बाद केसर के बीजों में अंकुरण आना शुरू हो जाता है ।

केसर के बीज का अंकुरण हो जाने के बाद लैब का तापमान 5 से 8 डिग्री सेंटीग्रेड रखना चाहिए साथ ही लैब में 800 ल्यूक हल्की प्रकाश की आवश्यकता होती है ।

नोट- ल्यूक एक प्रकाश मापने का पैमाना है, जिसके द्वारा प्रकाश मापा जाता है ।

केसर में उत्पन्न होने वाले रोग

केसर की एरोपोनिक खेती (kesar ki kheti) में अभी तक किसी भी प्रकार के रोग को नहीं देखा गया है क्योंकि इस विधि द्वारा केसर की खेती लैब में होती है जिसके कारण इसमें ना तो जल वातावरण में कोई बदलाव आता है |

केसर की खेती (kesar ki kheti) अगर पारंपरिक रूप से होती है तो इसमें केसर अधिक जल हो जाने के कारण केसर के सरने की संभावना बढ़ जाती है साथ ही इसमें मकड़ी के जाल को भी लगने के बाद इसमें बहुत से नुकसान देखे जाते हैं |

पानी की आवश्यकता

आपको बता की एरोपोनिक तकनीकी द्वारा केसर की खेती करने पर पानी के आवश्यकता नहीं होती है | इसमें पानी की आपूर्ति कमरे के तापमान से ही हो जाती है |

केसर की खेती एरोपोनिक तकनीकी द्वारा करने के लिए ट्रेनिंग कहां से लें

केसर की खेती (kesar ki kheti) एरोपोनिक तकनीक द्वारा करना भारत में एक नई तकनीक है जिसका बहुत ज्यादा लोग इसके बारे में जब बहुत ज्यादा लोग नहीं जानते हैं यदि आप एयरप्लेन तक नहीं इसे कैसे की खेती करना चाहते हैं तो केसर को उगाने के संबंध में जानकारी को प्रशिक्षण प्राप्त करना |

आपके लिए बहुत आवश्यक होगा पालमपुर में स्थित Council of scientific and Industrial Research (CSIR)- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार द्वारा केसर की व्यावसायिक खेती या फिर रुपए की खेती के बारे में ट्रेनिंग दिया जाता है |

केसर की हरवेस्टिंग कब और कैसे करें

केसर 3 महीने में पूरी तरह से हार्वेस्टिंग करने के लिए तैयार हो जाता है किसी की फूलों से निकलने वाला केसर के फूलों से केसर निकालना बहुत ही नाजुक और मेरे मेहनत वाला काम होता है केसर की हार्वेस्टिंग करने के लिए केसर को के बारे में जानना बहुत जरूरी होता है ।

केसर की मुख्यतः तीन भाग होते हैं-

  1. केसर की पंखुड़िया
  2. केसर
  3. पुंकेसर

विशेषज्ञों के अनुसार उच्च गुणवत्ता का केसर पाने के लिए केसर के फूल खिलने के अगले दिन ही उसे हार्वेस्ट कर लेना चाहिए |केसर की हार्वेस्टिंग करते समय केसर के तीनों भागों को अलग करना होता है | जिसकी बाजार में बहुत ज्यादा मांग रहती है केसर की इन तीनों भागों को ध्यान पूर्वक अलग-अलग संरक्षित करना होता है | हार्वेस्टिंग के बाद केसर को हल्की धूप या छायादार स्थान पर कहा जाता है शुभ ज्ञान उपयोग किया जाता है या बिक्री के लिए पूर्ण रूप से तैयार हो जाता है |

केसर की खेती में लागत

अगर आप केसर की खेती (kesar ki kheti) एरोपोनिक तकनीक द्वारा कर रहे हैं तो आपको पहले वर्ष में 5 से 8 लाख रुपए तक की लागत आ सकती है परंतु पहले वर्ष में लैब तैयार करना, आवश्यक मशीन, खरीदना व अन्य जरूरी संसाधन खरीदने की जरूरत होती है |

इसके अगले साल आपको सिर्फ केसर के कोक को खरीदने में ही पैसा लगेगा और अगर आप चाहे तो कैसे के बल्ब को खुले वातावरण में भी उगा सकते हैं जिसमें आपकी लागत में कमी आएगी |

केसर की खेती (kesar ki kheti) में मुनाफा

अगर आप केसर से अच्छी तरह से परिचित हैं तो शायद आपको बताने की जरूरत न हो की केसर कितना महंगा बिकता है | फिर भी आपको केसर की कीमत बाजार में 2.5 से 5 लाख के बीच होती है यह तो सिर्फ केसर की कीमत है केसर के साथ में के पौधे के हर भाग की राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बहुत मांग रहती है तथा इसकी भी बहुत ज्यादा मांग रहती है |

आशा करता हूं कि आपको केसर की एरोपोनिक तकनीकी द्वारा खेती की (kesar ki kheti) जानकारी अच्छी लगी हो, फिर भी आप कमेंट में यह जानकारी कैसी लगी जरूर बताएं तथा अन्य आधुनिक कृषि की जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर जरूर विजित करें | धन्यवाद !