Kekada Palan – केकड़ा पालन शुरू कीजिये | लागत कम और मुनाफा ज्यादा |

केकड़ा पालन (Kekada Palan) से महज कुछ ही महीने में कर सकते हैं मोटी कमाई भारत ही नही बल्कि पूरे विश्व में इस उत्पाद की बहुत अधिक मांग है |

Kekada Palan

जैसा कि आप जानते हैं मनुष्य की उत्पत्ति जब से पृथ्वी पर हुई है | तब से हर किसी जीव को अपने उपयोग में ला रहा है किसी को अपने काम के रूप में तौर पर उपयोग कर रहा है तथा किसी को और खाने के रूप में उपयोग कर रहा है | ऐसा ही एक जीव है जिसका उपयोग मनुष्य खाने के रूप में कर रहा है, परन्तु मनुष्य इन जीवों का उपयोग पहले के समय में प्रकृति के द्वारा ही करते थे | लेकिन आज बढ़ती जनसंख्या के कारण इन जीवों की कमी हो गयी हैं | जिसके कारण अपनी उपयोग के लिए इनका पालन पड़ रहा है |

विज्ञान कहता है पृथ्वी पर मौजूद हर एक जीव किसी न किसी रूप में एक दूसरे जीव पर निर्भर है | चाहे वह अपने काम के रूप में या फिर खाने के रूप में उपयोग कर रहा हो | कुछ ऐसे जीव हैं जो अपने जीवन को सुगम बनाने के लिए दूसरे जीव का उपयोग करते हैं तथा कुछ जीव ऐसे हैं जो अपना पेट भरने के लिए दूसरे जीव का उपयोग करते हैं |

आज हम एक ऐसे ही जीव का के बारे में बात करने वाले हैं जिसका नाम है केकड़ा है | साथ ही यह भी बताने वाले हैं की केकड़ा पालन क्या है, कैसे कर सकते हैं केकड़ा पालना फायदा तथा मुनाफे की सम्पूर्ण जानकारी आज आपको इस ब्लॉग की सहायता से मिलेगी | तो आप इस ब्लॉग को अवश्य पूरा पढ़ें |

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Table of Contents

केकड़ा पलान (Kekada Palan) क्या है

केकड़ा पालन (Kekada Palan) एक्वाकल्चर के अंतर्गत आता है | जिसमें मछलियों की तरह ही केकड़ा नामक जीव को पाला जाता है | केकड़ा एक समुद्री जीव है | जिसका वैज्ञानिक नाम Brachyura है जो की समुद्र के तलहटी में रहता है | जिसे मनुष्य अपने खाने के रूप में उपयोग करता है | केकड़े की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बहुत अत्यधिक मांग रहती है |
पहले यह समुद्र से आसानी से उपलब्ध हो जाता था, परंतु बढ़ती जनसंख्या की मांग की आपूर्ति के कारण इसे पाला जा रहा है | केकड़े की व्यापक मांग के कारण इसे तटीय राज्यों में अधिक पाला जा रहा है | जिसमें तमिलनाडु,आंध्र प्रदेश, केरल एवं कर्नाटक आदि राज्य में किसान इसकी इसकी खेती करके एक से दो किलो का केकड़ा है तैयार कर रहे हैं |
केकड़ों की कीमत बाजार में अच्छी मिलती है जिससे किसानों को भी अच्छा मुनाफा हो रहा है | इसमें मछलियों से कई गुना ज्यादा मुनाफा होता हैं |

केकड़ा पालन (Kekada Palan) की पुरानी विधि में केकड़ों को ऐसे ही तालाब के अंदर छोड़ दिया जाता था | जिसमें केकड़े आपस में अपने समाज की वर्चस्व के लिए लड़ते थे तथा एक दूसरे को ही मार देते थे | जिसके कारण इनकी संख्या में कमी आ जाती थी | तालाब में केकड़े लड़ने के लड़ते लड़ते लगभग 50% ही बच पाते थे | जिससे केकड़ा पालन करने वाले किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता था |

परंतु आज के आधुनिक केकड़ा पालन (Kekada Palan) में केकड़ों को डिब्बे में रखा जाता है जिससे केकड़े एक दूसरे से लड़ नहीं पाए तथा उनकी संख्या में भी कमी नहीं होती और केकड़ों को बॉक्स के अन्दर ही भोजन भी पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है जिससे उनकी वृध्दि भी बहुत जल्दी और अच्छी होती है |

केकड़ा खाने के फायदे

केकड़ा प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है | इसे खाने से कैंसर का खतरा भी कम होता है | केकड़े में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है | जिसके कारण केकड़ा मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी होता है | केकड़े के सेवन से शुगर तथा ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है केकड़े के मांस में ओमेगा 3 फैटी एसिड तथा नियासिन और क्रोमियम जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को बहुत कम करने में मदद करते हैं | जिससे हार्ट अटैक जैसी समस्याएं नहीं आती है | केकड़ा प्रोटीन के साथ विटामिन b12 का भी एक अच्छा स्रोत है |

जिसके जो हमारे ब्लड की कोशिकाओं की गिनती को बढ़ाने का काम करता है | नियमित रूप से केकड़ा सेवन करने से असंतुलित वजन की समस्या से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है | साथ ही घुटने और जोड़ों के दर्द में भी छुटकारा पाया जा सकता है | केकड़े के इसी सभी फायदे के कारण ही बाजारों में इसकी बहुत ज्यादा डिमांड रहती है | इसके कारण ही केकड़ा पालन में भी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है |

केकड़ा पालन के लिए मुख्य प्रजाति

हमें केकड़ा पालन (Kekada Palan) करने से पहले जान लेना जरूरी है कि कितने प्रकार प्रजाति के होते हैं | आपको बता दे कि भारत में केकड़ा पालन (Kekada Palan) की के अंतर्गत मुख्यतः दो प्रजातियां ही आती हैं | जिनकी राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अत्यधिक मांग होती है | इन दोनों प्रजातियों में बहुत ज्यादा डिमांड होती है | जिनका विस्तार पूर्वक वर्णन नीचे किया गया है-

  • बड़ी प्रजाति (Green Mub Crab)
  • छोटी प्रजाति (Red Claw)

1. बड़ी प्रजाति (Green Mub Crab):- बड़ी प्रजाति केकड़ों को Green Mub Crab या हरे मड क्रैब कहते हैं | इनका आकार लगभग 12 सेंटीमीटर तथा वजन लगभग 2 किलोग्राम होता है | इनको पानी में रहने की आदत होते हैं | जिस कारण का शरीर कई तरह के चिन्ह पाए जाते हैं |

Green Crab

2.छोटी प्रजाति (Red Claw):- छोटी प्रजाति के केकड़ों की पंजे लाल होने के कारण इन्हे Red Claw रेड क्लॉ कहते हैं | इनका आकार लगभग 13 सेंटीमीटर और तथा वजन एक 1.2 से 1.5 किलोग्राम तक होता है | इन केकड़ों को पानी के साथ मिट्टी में रहने की भी आदत होती है |

Red Crab
केकड़ा पालन (Kekada Palan) के लिए योजना की तैयारी

किसान अपनी खेती में चाहता है कि उसे अधिक से अधिक फायदा हो इसलिए आज के किसानअन्य खेती के साथ-साथ केकड़ा पालन (Kekada Palan) भी कर रहे हैं | केकड़ा पालन से किसानों काफी अच्छा मुनाफा हो रहा है परंतु केकड़े की खेती करने से पहले उसे आपको भी एक योजना बनाना पड़ेगा | योजना बनाने के बाद केकड़ा फार्मिंग बहुत ही सरल तथा सुगम हो जाएगा, तो नीचे दिए गए बिन्दुओं को ध्यान पूर्वक पढ़ें जिससे आपको भी केकड़ा पालन (Crab Farming) करने बहुत ही सहायता मिलेगी |

  • केकड़े का बच्चा कहाँ से प्राप्त करें
  • केकड़ा पालन की आधुनिक विधि
  • केकड़े का भोजन
  • केकड़ा पालन के लिए स्थान
  • विशेषज्ञों से सलाह
केकड़े का बच्चा कहाँ से प्राप्त करें

केकड़ा पालन (Kekada Palan) करने के लिए आपको केकड़े के बच्चे या बीज की जरूरत पड़ेगी जो कि आपको अपने स्थानीय मछली मार्केट या फिर आपके नजदीकी क्षेत्र के मत्स्य विभाग में मिल जाएगा केकड़े के बीज या बच्चों की कीमत लगभग ₹200 से ₹500 प्रति किलोग्राम मिलता है | इसके अलावा केकड़े के बीच खरीदते समय ज्यादातर मादा केकड़ों को ज्यादा मात्रा में खरीदें | जिससे आपको भविष्य में केकड़ों के बीच या बच्चे ज्यादा न खरीदने पड़े |

इस समय महाराष्ट्र में बहुत बड़े तौर पर केकड़ा पालन व्यवसाय किया जा रहा है जिससे वहां बहुत सी केकड़ा सीड्स Crab seeds की नर्सरींयां तैयार की गई हैं जहां आसानी से आपको केकड़ा पालन के लिए भी केकड़े के बच्चे मिल जाएंगे |

ऑनलाइन (Crab seeds) केकड़े के बच्चे खरीदें

केकड़ा पालन की आधुनिक विधि (Modern method of crab farming)

पहले के समय में केकड़ा पालन (Kekada Palan) तालाबों में किया जाता था परंतु तालाब में करने से क्या करें वर्चस्व के कारण एक दूसरे से हमेशा लड़ते रहते थे | जिससे उनकी मात्रा में कमी आ जाती थी आज के आधुनिक केकड़ा पालन (Crab Farming) विधि में केकड़ों को बॉक्स के अंदर डालकर पाला जाता है | जिससे उनकी मात्रा में कमी भी नही होती है और उनकी वृध्दि भी अच्छे से होती है | आधुनिक केकड़ा फार्मिंग दो तरीके से होती है |

तालाब में बॉक्स को डालकर:- इस विधि से केकड़ा पालन करने पर केकड़े को बॉक्स में रखने के लिए ऐसे सेटअप बनाया जाता है जिसके की बॉक्स तैरता रहे | और इसमे समय समय पर केकड़े के लिए उपयोगी खाना तथा अन्य पदार्थ डालते रहते हैं |

Crab farming in pond

वर्टिकल केकड़ा पालन (Vertical Kekada Palan) :- यह केकड़ा पालन की एक आधुनिक तकनीकी है | जिसमें केकड़े को तालाबों न पालकर उसे ऊंचाई पर उर्ध्वाधर पाला जाता है | यह उसी प्रकार की प्रक्रिया जैसे वर्टिकल फार्मिंग में सब्जियों का उत्पादन किया जाता है | इस विधि से केकड़ा पालन करने से जगह की बचत होती है | इसको आप एक कमरे में भी कर सकते हैं | इसमे बहुत कम अंतर में पानी की भी बचत होती है | इस विधि तापमान को भी नियंत्रित करना पड़ता है तथा पानी को भी लगभग 15 दिन के अन्तराल में बदलना पड़ता है |

vertical crab farming

जानिए क्या है वर्टिकल फार्मिंग(Vertical Farming)और कैसे करें ? लाभ तथा प्रकार की सम्पूर्ण जानकरी |

केकड़ा पालन के लिए स्थान का चुनाव

केकड़े पालन (Kekada Palan) में ऐसे स्थान का चुनाव किया जाता है जो छिछले जल स्तर के अंतर्गत आता हो यह स्थान पारंपरिक तालाब या फिर कृत्रिम रूप से भी बनाया जा सकता है केकड़े ऐसे स्थान पर ज्यादा रहते हैं जहां पर नमी बरकरार रहती हो |

इसलिए ऐसे स्थान का चुनाव करें जहां नमी की कमी ना हो साथ ही यह भी ध्यान दें कि वहां से पानी का रिसाव न हो क्योंकि जहां से पानी का रिसाव होता है वहां से केकड़े बाहर निकलकर भाग सकते हैं | केकड़े पत्थरों के बीच में या अतारिली जगहों पर रहना अधिक पसंद करते हैं इसलिए आप ऐसी जगह का निर्माण भी करा सकते हैं |

अगर आप आधुनिक पद्केधति के द्वारा वर्टिकल केकड़ा पालन बॉक्स में कर रहे हैं तो आपको 2500 किलोग्राम केकड़े के लिए 25 X 25 X 7 के उचें प्लास्टिक टैंक का निर्माण करना होगा क्योंकि जैसे-जैसे केके बड़े होंगे वैसे उनका वर्चस्व के लिए लड़ाई शुरू कर देते हैं इससे आपके केकड़ों को अलग-अलग बॉक्स में रख दे जिससे वह लड़ाई ना कर सके और उनकी संख्या भी न्प्रभावित हो सके |

केकड़ा पालन (Kekada Palan) के लिए पानी की गुणवत्ता

केकड़ा पालन (Kekada Palan) के लिए सबसे ज्यादा जरूरी पानी होता है क्योंकि केकड़ा हमेशा पानी में ही रहता है बहुत कम समय के लिए पी से बहार आता है , इसलिए केकड़ा पालन के लिए पानी में क्या-क्या होनी जरूरी होता है यह भी जानना जरूरी होता है |

केकड़ा पालन के लिए पानी की लवणता 15 से 25% होनी चाहिए तथा तापमान 26 से 30 अंश सेल्सियस होना चाहिए और ऑक्सीजन की मात्रा 3 पीपीएम होनी चाहिए तथा पानी का पीएच 7.8 से 8.5 तक होना चाहिए | इसे केकड़ा केकड़े की वृद्धि अच्छे से होती है | साथ ही पानी में इन सब की मात्रा को हमेशा चेक करते रहना चाहिए अगर पानी में कुछ दोष आ जाये तो पानी को बदल देना ज्यादा लाभदायक हो होगा |

केकड़ा पालन में भोजन(Food in Crab Farming)

केकड़ा पालन (Kekada Palan) में केकड़ों को दिन में २ बार भोजन दिया जाता है | केकड़ा ज्यादातर मांसाहार ही होते हैं इसलिए केकड़ों को चारे के रूप में दैनिक दर पर मछली, नमकीन पानी में पाए जाने वाले सीपी, पशुओं के आंत तथा चिकन के अपशिष्ट पदार्थ दिए जाते हैं | केकड़ों को यह भोजन उनके वजन के 5 से 8% की दर से दिया जाता है |

कड़ेपन की जाँच

केकड़ा पालन (Kekada Palan) में केकड़े का मांस लगभग 7 से 12 महीना के अंदर कड़ा होने लगता है | इसकी जांच के लिए केकड़े के पैर के नीचे के मांस को दबाकर चेक किया जाता है | अगर मांस आसानी से दब जाता हो तो यह निशानी है | कि अभी केकड़ा बिक्री के लिए तैयार नहीं है | यदि मांस दब नहीं रहा हो तो समझ लें की केकड़ा बाजार में बिक्री के लिए तैयार हो जाता है | अब केकड़े की बिक्री की जा सकती है |

केकड़े को बाजार में बेचने के लिए कैसे तैयार करें

बाजार में केकड़े को बेचने के लिए केकड़े को पानी से बाहर पड़कर निकाल लिया जाता है तथा उसकी गंदगी व कीचड़ को अच्छे से साफ कर दिया जाता है | पानी से निकलना लेने के बाद से नमकीन पानी से अच्छे से धोया जाता है | केकड़े को अच्छे से धोने के बाद इसे सावधानीपूर्वक उनके पैरों और पंजों को डोरी अथवा पट्टी की सहायता से अच्छे से बांध लिया जाता है तथा इन्हें नमी में रखकर बाजार में बेचने के लिए भेज दिया जाता है |

सावधानी:-

  1. केकड़े को डोरी से बांधते समय या ध्यान दें कि उसके टांग या पंजे टूटे ना क्योंकि अगर उसके पंजे या टांग टूट जाते हैं तो बाजार में उसके उसका मूल्य नहीं मिलेगा होता है |
  2. बाजार में हमेशा जीवित केकड़े को ही बेचा जाता है इसलिए यह जरूरी होता है कि केकड़े को हमेशा नामी में रखें जिससे वह जीवित रहें |
  3. केकड़े का मूल्य उसके कड़ेपन पर ही आधारित होता है इसलिए बंधे हुए केकड़े को किसी भी हाल में धूप और गर्मी से बचना जरूरी होता है |

केकड़ा पालन को कैसे शुरू करें

अगर आप केकड़ा पालन करना चाहते हैं तो आप पह ले एक या दो बॉक्स को लायें अगर आपको सफलता मिलाती है तो फिर आप और अधिक बॉक्स ला कर केकड़ा पालन करें | इससे यह होगा की आप कम लागत में ही एक अनुभव ग्रहण कर सकते हैं |

केकड़ा पालन में लागत

केकड़ा पालन (Kekada Palan) में लागत की बात की जाए तो केकड़ा पालन दो तरीके से होता है | जिसमें अगर आप तालाब में केकड़ा पालन करते हैं तो आप अगर ₹200000 तालाब में इनवेस्ट करेंगे तो बॉक्स के साथ सभी लागत को लेकर लगभग 500 बॉक्स आएंगे परंतु अगर वही आप वर्टिकल केकड़ा पालन कर रहे हैं तो आपको 2 लाख में सिर्फ 100 बॉक्स ही आएंगे | जिसमे आप एक बॉक्स में सिर्फ एक ही केकड़ा रख सकते हैं | वर्टिकल केकड़ा पालन उनके लिए ज्यादा बेहतर है | जिसके पास तालाब नही है |

केकड़ा पालन में मुनाफा(Profit in Kekada Palan)

केकड़ा पालन (Kekada Palan) में मुनाफे की बात की जाये तो एक केकड़े की बाजार में कीमत तो सॉफ्ट सेल वाले केकड़े की कीमत 1000 से 3000 तक होती है | वाही कड़े केकड़े की बात की जाये तो बाजार में उसकी कीमत लगभग 800 से 1500 रुपये प्रति किलो की दर से मिल सकता है |

अगर आप वर्टिकल केकड़ा पालन कर रहे हैं तो आप 100 बॉक्स से महीने के लगभग 20 हजार से ज्यादा कमा सकते हैं और अगर आप तालाब में बॉक्स में केकड़ा पालन कर रहे है तो आप 500 बॉक्स से लगभग 80 से 90 हजार रुपये कमा सकते हैं तथा अगर आप उसी तालाब में मछली पालन भी कर रहे हैं तो उससे भी आमदनी होती रहेगी |

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