Kantola Farming- कंटोला फार्मिंग से किसान कमा रहे लाखों रुपये जानिए कैसे करें खेती |

Kantola Farming in Hindi- सारी दुनिया में लोग अपने शरीर को स्वस्थ्य और ताकतवर बनाने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन सर रहें हैं जिससे हमारे शरीर में इम्यूनिटी बरकरार रखें जिससे हमारे शरीर की बीमारियां दूर हो सकें | आज हम आपको इस ब्लॉक के माध्यम से एक ऐसी फसल के बारे में बताने वाले हैं जो कि आपकी सेहत के लिए बहुत लाभदायक साबित होगी | जिसको हमारे आयुर्वेद में भी अपने औषधीय गुणों के कारण बहुत प्रसिद्धि मिली है |

इस सब्जी में मांस से लगभग 40 गुना अधिक प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है इस सब्जी में मौजूद फाइटोकेमिकल्स हमारे शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाये रखने में मदद करता है जिससे हमारा शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम रहता है |

kantola Farming

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कंटोला क्या है ? What is Kantola

कंटोला एक सब्जी है जो कद्दू वर्गीय फसल के अंतर्गत आता है | इसका वैज्ञानिक नाम मोमोर्डिका डायोइका (Momordica dioica)है | इसके अलावा भारत में इसे खेख्शा, ककोड़ा, ककोरा, कर्कोटकी आदि नाम से जाना जाता है | कंटोला का पौधा जो की जंगली इलाकों में अपने आप भी उग जाता है | कंटोला के मादा पौधे से 8 से 10 वर्षों तक फसल प्राप्त की जा सकती है | ककोड़ा का इस्तेमाल सब्जी के रूप में, आचार के रूप में, खाद्य सामग्री बनाने के लिए किया जाता है |

कंटोला का इस्तेमाल औषधि के रूप में भी किया जाता है | कंटोला से खांसी कीटनाशक कफ, अरुचि वात और हृदय संबंधित बीमारी यो से छुटकारा मिलता है इसके सेवन से खूनी बवासीर, पेशाब की समस्या तथा और बुखार में बहुत ही लाभकारी माना जाता है |

कंटोला बहुत ही स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी है | जिसकी वजह से इसकी बाजार में काफी अच्छी मांग रहती है तथा इसकी कीमत भी बहुत अधिक रहती है | किसान भाइयों के लिए कंटोला की खेती (Kantola Farming) बहुत मुनाफे का सौदा होगा | तो आज हम आपको इस ब्लॉक के माध्यम से बताने वाले हैं कि कंटोला की खेती (Kantola Farming) कैसे करते हैं ? कंटोला के फायदे, इसकी खेती में लागत तथा मुनाफा कितना होता है |

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कंटोला की खेती Kantola Farming कैसे की जाती है ?

आज के इस समय में ज्यादातर लोग अस्वास्थ्यकर भोजन कर रहे हैं परन्तु कुछ लोग अपने स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए सेहत मंद और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन ले रहे हैं | साथ ही भारतीय बाजारों में इसकी अच्छी खासी डिमांड है इसकी खेतीं के लिए किसी खास मिट्टी, जलवायु और तापमान की भी जरूरत नही होता | हमारे किसान भाई इसकी खेती कर के अपनी कृषि में मोटी कमाई कर सकते हैं |

कंटोला की खेती (Kantola Farming) के लिए किसी खास प्रकार की मृदा की आवश्यकता नहीं होती है | इसकी खेती ऐसी भूमि में करें जिनमें अधिक मात्रा में जैविक पदार्थ हों साथ ही भूमि भी रेतीली हो | कन्टोला की खेती (Kantola Farming) करने के लिए ऐसी भूमि का चयन करें जहाँ पानी का भराव न हो | साथ ही उस भूमि का PH मान भी 6 से 7 के बीच ही हो |

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कन्टोला की कुछ प्रमुख किस्में

आज के समय में कन्टोला की कुछ विशेष किस्में हैं जिनको अनुकूल वातावरण में अच्छी पैदावार के लिए बनाया गया है | जो कि निम्नलिखित हैं –

  1. अम्बिका-12-1
  2. अम्बिका-12-2
  3. अम्बिका-12-3
  4. इंदिरा कंकोड़-1

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कन्टोला की खेती (Kantola Farming) के लिए खेत की तैयारी

कन्टोला की खेती (Kantola Farming) के लिए आपको खेती आपको खेत में से सभी खर पतवार को अच्छी तरह से साफ कर लेना होगा | खरपतवार साफ कर लेने के बाद आपको खेत में पानी को भर देना है जिससे खेत में अच्छी तरह से नमी बन जाये | खेत से पानी सूख जाने के बाद आपको अच्छी तरह से खेत की 2 से 3 बार जुताई करके मिट्टी को अच्छी तरह से भुरभुरी बना लेनी है |

आपको खेत में पहली जुताई के बाद ही खेत में 200 से 250 कुंतल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से जैविक खाद को डाल देनी है | इसके बाद खेत को अच्छे से समतल कर देना है | इसके बाद इसमे आपको पावर ट्रिलर की सहायता से या फिर फावड़े की मदद से बेड को बना लेना है |

कन्टोला की खेती (Kantola Farming) में उर्वरक

कन्टोला की खेती (Kantola Farming) में अधिक पैदावार के लिए जैविक खाद के साथ रासायनिक खाद देना जरूरी होता है | खेत की तैयारी करते समय पहले जुताई में ही 200 से 250 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से जैविक खाद देना चाहिए | खेत की तैयारी में अंतिम जुताई के बाद 67 kg एमओपी , 65 kg यूरिया और 375 kg एसएसपी प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में मिलाना जरूरी होता है | इससे कन्टोला की खेती (Kantola Farming) में ज्यादा पैदावार मिलाता है और खेती करने वाले किसान को भी अधिक मुनाफा होता है |

कंटोला के बीज की रोपाई का तरीका कंटोला की खेती (Kantola Farming) करने के लिए कंटोला के बीच को नहीं बल्कि कंटोला के पौधों की रोपाई की जाती है | इसके लिए बीजों को पहले नर्सरी में तैयार कर लिया जाता है | आपको बता दे की कंटोला के दो प्रकार के पौधे होते हैं, एक नर और एक मादा | इसमें से जो पौधा नर होता है वह फल नहीं देता बल्कि मादा पौधा इसमें से फल देता है |

फिर भी कन्टोला की खेती (Kantola Farming) में दोनों पौधों को लगाया जाता है सिर्फ एक पौधे से ही कोई फल नहीं मिलेगा । खेत तैयार करने के बाद खेत में 2 मीटर की दूरी पर पंक्ति में गड्ढे बना लिए जाते हैं इन पंक्तियों के बीच में 4 मी की दूरी रखा जाता है और प्रत्येक पंक्ति में 9 से 10 गड्ढे बनाए जाते हैं इन गड्ढो में 7 से 8 मादा पौधे लगाए जाते हैं तथा बाकी गड्ढे में नर पौधे लगाए जाते हैं पौधों को लगाने के बाद पौधों को मिट्टी से अच्छे से ढक दिया जाता है |

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कन्टोला की खेती (Kantola Farming) में सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण

कन्टोला की खेती (Kantola Farming) में सिचाई कीन अधिक जरूरत नहीं होती है क्यों कि इसकी खेती बरसात में ही की जाती है, तो बारिस के कारण खेत में पर्याप्त मात्रा में नमी बनी रहती है | जरूरत पड़ने पर ही खेत की सिचाई करें और ज्यादा पानी भर जाने पर उसे खेत से निकल दें नही तो फसल सड़ने का खतरा भी रहता है |

इसकी खेती में 2 से 3 बार गुड़ाई की जरूरत होती है 2 से 3 बार गुड़ाई करने पर खरपतवार नियंत्रित रहते ही हैं |

कन्टोला के फसल की कटाई

कन्टोला की फसल की कटाई व्यापारिक उद्देश्य से की जाती है | कन्टोला की कटाई इसके गुणवत्ता के अनुसार की जाती है | इसकी पहली फसल 2 से 3 माह के पश्चात प्राप्त की हो जाती है | इस समय आपको ताजा स्वस्थ और छोटे आकर के कारण कन्टोला प्राप्त होंगे इसकी कटाई आप 1 साल के बाद भी कर सकते हैं |

1 साल के बाद फसल तोड़ने पर उसकी गुणवत्ता काफी अच्छी पाई जाती है जिसकी मार्केट में ज्यादा मांग होती है | इसकी कीमत भी 150 रुपए प्रति किलो या फिर उससे अधिक भी हो सकता है |

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कन्टोला में पाए जाने वाले पोषक तत्व

कन्टोला एक ऐसी सब्जी है जो अपने औषधीय गुण के कारण काफी चर्चा का विषय बनी रहती है | आपको बता दें कि इसमें मांस से लगभग 20 गुना ज्यादा विटामिन की मात्रा पाई जाती है | कंटोला में विटामिन A, विटामिन B1,B2,B3,B5,B6,B9,B12, विटामिन C, विटामिन D2, D3, विटामिन H और विटामिन K की बहुत अधिक मात्रा पाई जाती है | कन्टोला में कार्बोहाइड्रेट, सोडियम, मैग्नीशियम, फाइबर, कैल्शियम, पोटेशियम, कॉपर, जिंक, पोषक तत्व भी बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते हैं | जो कि हमारे शरीर को शक्ति प्रदान करते हैं और शरीर को तंदरुस्त बनाने में सहायता करते हैं |

कंटोला खाने के फायदे

कंटोला एक ऐसी सब्जी है जो कि किसी औषधि के तौर पर खाया जाता है | इसमे भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो कि हमारे शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक होता है | कंटोला खाने के कुछ फायदे निम्नलिखित हैं-

  1. कंटोला में मौजूद फाइबर की मात्रा हमारे शरीर के वजन को कम करने में सहायता करती है |
  2. फाइबर डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है और रोगियों के रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है | इसीलिए कन्टोला का सेवन डायबिटीज रोगियों को अवश्य करना चाहिए |
  3. कंटोला में पाए जाने वाले कैल्शियम और मैग्नीशियम हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत करते हैं |
  4. यह हमारे पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद है |
  5. कंटोला में पानी मौजूद होने के कारण इसके सेवन से हमारे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है |

आशा करता हूं कि आपको कन्टोला की खेती (Kantola Farming) जानकारी अच्छी लगी हो, फिर भी आप कमेंट में यह जानकारी कैसी लगी जरूर बताएं तथा अन्य आधुनिक कृषि की जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर जरूर विजित करें | धन्यवाद !

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