जानिए क्या है वर्टिकल फार्मिंग(Vertical Farming)और कैसे करें ? लाभ तथा प्रकार की सम्पूर्ण जानकरी |

वर्टिकल फार्मिंग आज के समय की आधुनिक कृषि प्रणाली है | जिसमे फसलों को क्षैतिज नहीं बल्कि उर्ध्वाधर उगाया जाता है |

vertical farming

आज के समय में भारत भारत हर एक क्षेत्र में आधुनिक हो रहा है जिसमे से एक आधुनिकीकरण कृषि में भी हो रहा है | शदियों से ही पारम्परिक कृषि कर रहा है | जिसमें से भारत के कृषकों को बहुत ज्यादा जमींन के साथ-साथ श्रम की भी आवश्यकता होती है | आज के समय में भारत की जनसंख्या पूरे विश्व में प्रथम स्थान पर है अगर पूरे भारत की भूख मिटाने की बात की जाये तो पारंपरिक कृषि के द्वारा बहुत मुश्किल होगा और भारत सिर्फ अपने देश की भूख मिटाने के लिए ही खेती नही करता बल्कि भारत से बहुत से देशों मेंअनाज का निर्यात किया जाता है | आधुनिक भारत में औद्योगिकिकरण में बहुत तेजी से वृद्धि हो रही है जिसके कारण कृषि योग्य जमीन खतरे में है इस सभी समस्याओं का वर्टिकल फार्मिंग एक बहुत ही अच्छा समाधान है इस खेती के इस्तेमाल से औद्यगिक क्षेत्र के साथ-साथ आधुनिक कृषि में भी क्रांति आएगी |

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वर्टिकल फार्मिंग क्या है ?

वर्टिकल फार्मिंग एक आधुनिक कृषि प्रणाली है | सन् 1915 ई० में गिल्बर्ट एलिस बेली ने ये शब्द दिया और उन्होंने वर्टिकल फार्मिंग पर एक किताब भी लिखी | वर्टिकल फार्मिंग पारम्परिक कृषि की तरह नही होती है इसमे खेती जमीन में क्षैतिज रूप से नही की जाती है बल्कि इस खेती में उर्ध्वाधर खेती की जाती है यह खेती बड़ी फसलों के लिए नहीं है | इस खेती को खड़ी खेती या शहरी खेती कहते हैं | इस खेती का मुख्य उद्देश्य शहरों में खेती करना था | इस खेती में बहुत उर्ध्वाधर खेती करने की वजह से इसमे बहुत कम जगह की आवश्यकता होती है तथा इसमे मिट्टी की भी आवश्यकता भी नहीं होती है | यह एक नया तरीका है जिसमें सीमित जमीन के साथ ही जल तथा अन्य संसाधनों के ठीक से उपयोग किया जाता है | इस कृषि में लगभग ९५% पानी का सरंक्षण होता है |अगर आप इस खेती की खुले वातावरण में करते हैं तो आपको तापमान नियंत्रित करना होगा |

यह खेती शहर के लोगो के लिए किसी किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि इसमें मिट्टी मिट्टी की आवश्यकता नही होती है और इसमे उगाई गयी फसल खेतों के मुकाबले पौष्टिक तथा तजा होती है | इस खेती को आप अपने बालकनी, बगीचे, कमरे तथा छत पर आसानी से कर सकते हैं |

वर्टिकल फार्मिंग के लाभ

आज के समय में कोई व्यक्ति किसी कम को करने से पहले उसके फायदे के बारे में जानना चाहता है तो आईये जानते हैं की वर्टिकल फार्मिंग के क्या-क्या लाभ हैं –

  • कम जगह में अधिक से अधिक उत्पादन |
  • पौष्टिक, शुद्ध व ताजे फसल का उत्पादन |
  • फसलों के ख़राब होने का खतरा बिल्कुल ना के बराबर |
  • जैविक उत्पाद की प्राप्ति |
  • पानी की लभभग ९५% तक बचत |
  • किसानों की आय में कई गुना बढ़ोत्तरी |
  • श्रम की बचत |

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वर्टिकल फार्मिंग के प्रकार

वर्टिकल फार्मिंग मुख्यतः तीन प्रकार की होती है | जिनके बारे में नीचे विस्तार से वर्णन किया गया है |

  1. हाइड्रोपोनिक्स तकनीक
  2. एरोपोनिक्स तकनीक
  3. एक्वापोनिक्स तकनीक

१. हाइड्रोपोनिक्स तकनीक :- यह वर्टिकल फर्मिंग की एक ऐसी तकनीक है जिसमें पौधे को बिना मीट्टी के ही उगाया और उसको पोषण दिया जाता है | इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, नाइट्रोजन तथा अन्य जरूरी पोषक पदार्थों को घोल के माध्यम से पौधों को दिया जाता है जिससे वे वृद्धि करते हैं | इस विधि में बहुत अधिक उपज की प्राप्ति होती है तथा इसमें लगभग ९५% तक कम पानी की आवश्यकता होती है | इस विधि के द्वारा पारंपरिक खेती के मुकाबले ११ गुना ज्यादा उपज प्राप्त की गयी है | इस विधि का अब के समय में बहुत व्यापक रूप से इस्तेमाल हो रहा है क्योकि इस विधि के द्वारा पूरे साल उपज की संभावना होती है तथा बहुत कम कीटनाशक तथा पेस्टिसाइड्स के उपयोग से |

hydroponic vertical farming

२. एरोपोनिक्स तकनीक :- यह एक ऐसी विधि है जिसमें जिसमें पौधों की जड़े हवा में लटकी रहती हैं | जिसमें स्प्रे के माध्यम के पोषक तत्वों का छिड़काव किया जाता है | इसमें पौधों को आर्द वातावरण में रखते हैं | इस तकनीक का उपयोग ग्रीन हॉउस के अन्दर तापमान, पी एच, आर्द्रता, जल तथा आदि को नियंत्रित कर के किया जाता है | इसमे भी फसल उत्पादन अच्छा होता है तथा फसल को नियंत्रित करना आसान होता है |

aeroponics vertical farming

३. एक्वापोनिक्स तकनीक :- यह वर्टिकल फार्मिंग की एक ऐसी विधि है जिसमें मछलियों के पालन के साथ-साथ पौधों को भी उगाया जाता है | इस खेती में मुख्यतः तीन घटक होते हैं – मछलियाँ, पौधे, तथा बैक्टीरिया |

इस विधि में एक सहजीवी बंध पाया जाता है जिसमें मछलियों का माल पौधों के उर्वरक के रूप में कम करता है तथा पौधे और बैक्टीरिया जल को मछलियों के लिए साफ करता है | यह खेती ग्रीन हॉउस में की जाती है जिसमे पूरे वर्ष तक फसलों का उत्पादन किया जाता है तथा मछलियों के बड़े होने पर उन्हें बेच कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है | इसमे किसी खास उर्वरक और पेस्टिसाइड्स का उपयोग नही किया जाता है |

aquaoponics vertical farming

वर्टिकल फार्मिंग कहाँ-कहाँ करें ?

१. इमारतों में लम्बवत खेती :- शहरों में वर्टिकल फार्मिंग के लिए इमारतों का उपयोग किया जाता है जिसमें फसलों को कमरे में या छत पर क्षैतिज रूप में नही बल्कि उर्ध्वाधर रूप में आलमारी के तरह खाने बनाकर किया जाता है |

२. शिपिंग-कंटेनर वर्टिकल फार्म :- इसमें वर्टिकल फार्मिंग करने के लिए शिप के कंटेनरों का उपयोग किया जाता है जिसमें उस कंटेनर का ताप नियंत्रित करके उसमे वर्टिकल फार्मिंग की जाती है | यह उन लोगों के लिए एक अच्छा उपाय है जिनके पास जमींन की समस्या है | इसके लिए इसमे एल ई डी प्रकाश की व्यवस्था के साथ जलवायु नियंत्रण तथा निगरानी सेंसर से लैस करना होता है |

३. भूमिगत लंबवत वर्टिकल फार्मिंग :- मिगत लंबवत वर्टिकल फार्मिंग, जिसे अक्सर वर्टिकल फार्मिंग टॉवर्स भी कहा जाता है, एक प्रकार की कृषि तकनीक है जिसमें फसलों को ऊँचाई पर उगाने के लिए वर्टिकल स्ट्रक्चर का उपयोग किया जाता है। इसमें फसलों के पौधों को लंबवत स्ट्रक्चर में खोलों या खिड़कियों के माध्यम से उगाया जाता है, जो एक साथ कई लेयर्स में होते हैं। यह तकनीक फसलों की अधिक उपज दर, स्थान की कमी, पानी की बचत, और प्रकृतिक खेती के साथ-साथ कई और लाभ प्रदान करती है।

वर्टिकल फार्मिंग कैसे करें

इस कृषि प्रणाली के लिए किसी कमरे में, छत पर या फिर किसी कंटेनर में बहु मंजिला ढांचा उर्ध्वाधर रूप में तैयार कर लें | इसके बाद सबसे नीचे वाले खाने में पानी भर दें और टैंक में एक पम्प रख दें | ऊपर छोटे-छोटे गमलों में पौधे रख दें तथा उसमें पम्प के जरिये बहुत कम मात्रा में पानी छोड़ें | पानी में पहले ही पोषक तत्व मिला दें | कमरे में बैगनी गुलाबी प्रकाश की एल इ डी लगा दें क्यों की पौधे गुलाबी और बैगनी किरण को ही अवशोषित करते हैं | अगर इसकी खेती को घर के छत पर करते हैं तो इसके लिए आपको तापमान का नियंत्रण भी करना होगा | इस खेती में पारंपरिक खेती के मुकाबले लगभग ९५ प्रतिशत कम पानी का प्रयोग होता है | शहरों में छतो पर गमले तथा कुछ फसली पौधे उगाने के लिए इसी प्रणाली का उपयोग किया जाता है |

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वर्टिकल फार्मिंग का एक उदहारण

मशरूम की वाणिज्यिक खेती को वर्टिकल खेती के साथ संयुक्त करने का सबसे आम उदाहरण “मशरूम की वर्टिकल खेती” होता है। इस प्रक्रिया में मशरूम पौधों को एक ऊँची स्थिति पर उगाया जाता है, जिससे सम्पूर्ण वाणिज्यिक खेती क्षेत्र का सबसे अच्छा उपयोग होता है।वर्टिकल मशरूम खेती अकेले मशरूम की वाणिज्यिक खेती के तुलना में अधिक उत्पादक हो सकती है और साथ ही प्रयोगकर्ताओं की मांग को संतुष्ट करने में मदद कर सकती है। इसके अलावा, यह बेहद सामर्थनीय और सायर फार्मिंग तंत्र में अच्छा विकल्प हो सकता है।

mushroom vertical farming

वर्टिकल फार्मिंग के महत्त्व

जगह की बचत :- इसमें पारम्परिक खेती की तरह बहुत ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती इसे करने के लिए एक कमरे जितना जगह भी बहुत होता है |

फसल उत्पादन :- इस कृषि प्रणाली में आप पूरे साल फसल का उत्पादन कर सकते हैं तथा पारंपरिक कृषि के मुकाबले कई गुना अधिक भी उत्पादन किया जा सकता है |

प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण :- वर्टिकल फार्मिंग क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है, क्योंकि इसमें कम पानी, उर्वरक, और जगह की आवश्यकता होती है।

खाद्य सुरक्षा :- वर्टिकल फार्मिंग क्षेत्रों में खेती की अधिकतम संभावना होती है, जिससे खाद्य सुरक्षा में सुधार होता है और आपूर्ति के तंत्र की सुरक्षा होती है।

उत्पादन की गुणवत्ता का संरक्षण :- वर्टिकल फार्मिंग क्षेत्र में बेहतर वातावरण नियंत्रण किया जा सकता है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता को सुरक्षित रखा जा सकता है |

स्वास्थ्य और पर्यावरण का समृद्धि :- वर्टिकल फार्मिंग में की जाने वाली खेती तकनीकें पेशेवर और स्वास्थ्यपूर्ण उत्पादन की ओर प्रोत्साहित कर सकती हैं, और पर्यावरण के साथ समझौता करने में मदद कर सकती है।

वर्टिकल फार्मिंग करने के लिए प्रोत्साहना

अभी के समय में ज्यादा लोग वर्टिकल फार्मिंग के बारे में नही जानते हैं इसलिए

वर्टिकल फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकारी, गैर सरकारी और व्यवसायिक संगठनों के द्वारा कई प्रकार के प्रोत्साहन मौद्रिकेण सकते हैं। यहां कुछ प्रमुख प्रोत्साहन के उदाहरण हैं

सब्सिडी और ऋण: सरकारें वर्टिकल फार्मिंग को प्रोत्साहित करने के लिए खेती संबंधित सामग्री, तकनीकी उपकरण, और प्रौद्योगिकी की जांच और उपयोग को सब्सिडी द्वारा सस्ता कर सकती है। उन्हें वर्टिकल फार्मिंग के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर सकती है।

तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण: सरकार और व्यवसायिक संगठन वर्टिकल फार्मिंग की तकनीकों की शिक्षा और प्रशिक्षण की प्राधिकृत योजनाएं चला सकते हैं, जिससे किसानों को इसके लिए तैयारी हो सके।

समृद्धि योजनाएं: सरकारें वर्टिकल फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं बना सकती हैं, जिनमें इसे स्थापित करने और चलाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

बाजार पहुंच: वर्टिकल फार्मिंग के उत्पादों को बाजार में पहुंचाने के लिए वित्तीय सहायता, प्रमोशन, और बाजार अधिग्रहण योजनाएं बना सकते हैं।

साझेदारी: साझेदारी के माध्यम से व्यवसायिक संगठन और निवेशक वर्टिकल फार्मिंग परियोजनाओं का समर्थन कर सकते हैं और इसे बढ़ावा दे सकते हैं।

शिक्षा और साक्षरता: वर्टिकल फार्मिंग के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए शिक्षा और साक्षरता कार्यक्रम चला सकते हैं, ताकि लोग इसके फायदे और तकनीकों को समझ सकें।

स्थानीय उत्पादों का प्रोत्साहन: स्थानीय उत्पादों को सहायक रूप से प्रोत्साहित करने के लिए विशेष वित्तीय योजनाएं तैयार की जा सकती हैं, जो वर्टिकल फार्मिंग के उत्पादों को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं।

आशा करता हूँ की आपको हमारा ये पोस्ट पढ़ने के बाद वर्टिकल फार्मिंग के बारे में जानकारी मिली होगी | आपको यह पोस्ट पढ़ने में कैसा लगा हमें कमेंट कर के जरूर बताएं

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